क्यों नहीं है किसी देश के पास बैंगनी रंग का राष्ट्रध्वज

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झंडा

राष्ट्रध्वज किसी भी देश की आन,बान और शान होती है। किसी भी देश की पहचान सबसे पहले उसके राष्ट्रध्वज से ही की जाती है। जैसे भारत के झंडे में केसरिया रंग साहस और बलिदान का रंग है, सफेद रंग सच्चाई, शांति और पवित्रता और हरा रंग संपन्नता को दर्शाता है। इसी तरह दुनिया के सभी देशों के झंडों का मतलब अलग-अलग होता है। लेकिन आपने कभी किसी भी देश के राष्ट्रीय ध्वज में बैंगनी रंग नहीं देखा होगा। इसके पीछे भी बहुत सी वजह हैं।

1.एक पाउंड बैंगनी डाई खरीदने में 41 लाख का आता है खर्चा:-

डॉलर

साल 1800 तक बैंगनी रंग बनाना बहुत कठिन था। उस समय बैंगनी रंग बनाने के लिए लेबनान के छोटे समुद्री घोंघे ही एकमात्र स्रोत थे। 1 ग्राम बैंगनी रंग को बनाने के लिए 10 हजार से ज्यादा घोंघे मारे जाते थे। इसके बाद इस रंग से डाई बनाने में जादा लागत और खर्च लग जाता था। जिसके बाद 1 पाउंड बैंगनी डाई खरीदने में 41 लाख रुपये तक का खर्च आता था। साथ ही साथ आपको पता ही होगा कि उस समय तक बहुत से देश गुलाम थे,वो इतना पैसा एक रंग पर नहीं लगा सकते थे जिस कारण से सभी देशों द्वारा बैंगनी रंग को झंडों में रखना मना कर दिया गया था।

2.क्वीन एलिजाबेथ की घोषणा :-

क्वीन एलिज़ाबेथ

उस समय ये रंग इतना महंगा हुआ करता था कि आम जनता इसे खरीदने में आसमर्थ थी,पर ये जानने के बाद भी क्वीन एलिजाबेथ ने ये घोषणा की थी कि रॉयल फैमिली के अलावा कोई भी बैंगनी रंग नहीं पहन सकता है। उस समय विश्व के बहुत से देश ब्रिटेन के गुलाम थे,तो अब इस घोषणा के बाद वो देश चाहते हुए भी अपने देश के झंडे का रंग बैंगनी नहीं रख सकते थे।

3. वह दो देश जिनके ध्वज में शामिल है बैंगनी रंग :-

बैंगनी रंग झंडा

वर्ल्डोमीटर्स (worldometers) वेबसाइट के मुताबिक, दुनिया में 195 देश हैं, इसमें सिर्फ 2 देश ऐसे हैं जिनके राष्ट्रीय ध्वज में बैंगनी रंग है। साल 1856 में विलियन हेनरी पर्किन सिंथेटिक बैंगनी डाई बनाने में कामयाब हुए, जिसके बाद इसकी कीमतें कम होने लगीं, लेकिन तब तक ज्यादातर देशों ने बैंगनी रंग से दूरी बना ली थी। लेकिन तब भी दो देश ऐसे बने जिन्होंने बैंगनी रंग को अपने ध्वज में समिल किया। इनमें पहला देश डॉमिनिका है, जहां बैंगनी ध्वज को साल 1978 में अपनाया गया था। वहीं दूसरा देश निकारागुआ बताया जाता है,इसने 1908 में इस रंग के झंडे को अपना लिया था।

Written By Sourav Choudhary

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