Monday, July 4, 2022
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Television ka aavishkar kab hua: भारत में टेलीविजन की शुरुआत

Television ka aavishkar kab hua इसके बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं तो चलिए जान लेते हैं, जब भी हम अपने आसपास मौजूद किसी चीज को देखते हैं तो हम सबके मन में यह सवाल उठता है कि इसका आविष्कार कैसे हुआ होगा या इसके पीछे क्या कहानी होगी।

ऐसा ही कुछ टेलीविजन के साथ भी होता है। कई लोग इसे देखते वक्त यह सोचते होंगे कि Television ka aavishkar kab hua.

तो चलिए हम आपको बताते हैं कि Television ka aavishkar kab hua और हमारे देश में ही कैसे पहुंचा।
कहते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है। मानव ने अब तक जितने भी अविष्कार किए वह अपनी जरूरतों के लिए किए। कुछ अविष्कारों से हमने अपनी रक्षा की, तो कुछ ने जिंदगी को बेहतर बनाया।

ऐसे ही अविष्कारों में से एक है टेलीविजन जिसने हमें शिक्षित भी किया, मनोरंजन भी दिया और सूचना भी दी। पहले जहां लोग नुक्कड़ नाटकों से अपना मन बहलाया करते थे वही आज इसकी जगह टेलीविजन ने ले ली है।

आज television हम सबकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो इसका प्रयोग ना करता हो। यह आज के समय में सूचना और मनोरंजन के लिए सब की जरूरत बन चुका है।

इसकी खास बात ये है कि इसे देखने के लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है बस एक click दबाते ही सारी दुनिया की जानकारी आपके पास आ जाती है। लेकिन अपनी शुरुआत में यह कुछ जगहों तक ही सीमित था लेकिन जैसे-जैसे इसका विकास होता गया वैसे वैसे यह लोगों की जरूरत बन गया।

टेलीविजन एक टेलीकम्युनिकेशन मीडियम डिवाइस है जिसका उपयोग फोटो, वीडियो और साउंड के साथ ट्रांसमीटर में किया जाता है। आज अमीर हो या गरीब हर कोई इसका इस्तेमाल कर रहा है। इसका इस्तेमाल advertising, news, sports और entertainment खबरों को लोगों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।

इसके के बारे में जानकर आप के मन में यह सवाल जरूर उठा होगा कि आखिर Television ka avishkar kab hua? और एक अविष्कार आखिर कैसे लोगों की जरूरत बन गया।

Television ka aavishkar kab aur kahan hua  :-

television

इसे देखते ही हमारे मन में यह सवाल तो जरूर आता होगा कि Television ka aavishkar kab hua? या फिर कहाँ हुआ होगा। इसका इस्तेमाल तो आज बहुत लोग करते हैं लेकिन उसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि कब और कहां शुरू हुआ।

इसकी शुरुआत उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी की शुरुआत में मानी जाती है। रेडियो की शुरुआत के बाद हमें ऐसी technology की जरूरत थी जो इससे तेज हो और इससे ज्यादा भरोसेमंद हो।

रेडियो के अविष्कार के बाद scientist को लगा कि अब एक ऐसी technology खोजनी चाहिए जिससे चित्रों (Photo) केसर के कोड को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजा जा सके उनकी सोच थी कि अगर चित्रों को जल्दी-जल्दी करके दिखाया जाएगा तो वह चलचित्र (Video) की तरह लगेगी और लोगों को अपनी तरफ आकर्षित भी करेंगी। इस तरह Photo से Video बनाई जा सकेंगी।

Television ka aavishkar kisne kiya  :-

television

आखिर कौन था वह जिसके दिमाग में इतनी बड़ी invention का idea आया। तो आइए बताते हैं आपको कि Television ka aavishkar kisne kiya। शुरुआती दौर में टेलीविजन के आविष्कार में pol nipko, Boris, जॉन लोगी बेयर्ड, फिलो फर्नसवॉर्थ, चा‌र्ल्स फ्रांसिस जेनकिंस और विलियम बेल।

फोटोज और वीडियोस इसके द्वारा बनायीं जा सकेंगी। यह हमारे लिए बेहद ही आसान हो जाएगा। Television ka aavishkar kisne kiya यह कभी न कभी बहुत से लोगों के मन में आता ही है।

टेलीविजन का अविष्कार सबसे पहले John Logie Baird ने 1925 में किया। इन्होंने अपने device का नाम television नहीं बल्कि the television रखा था। John ने इस पर सबसे पहले कठपुतली की छवि को प्रसारित किया और अपनी कठपुतली का नाम sticky bill रखा। यह पहला mechanical television था जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था।

1927 में, बेयर्ड ने लंदन से ग्लासगो के बीच 438 मील दूर टेलीफोन लाइन पर एक संकेत प्रेषित किया। 1928 में, बेयर्ड की कंपनी (बेयर्ड टेलीविज़न डेवलपमेंट कंपनी/सिनेमा टेलीविज़न) ने लंदन और न्यूयॉर्क के बीच पहला ट्रान्साटलांटिक टेलीविज़न सिग्नल, और पहला शोर-टू-शिप ट्रांसमिशन प्रसारित किया।

शुरुआत में इसे छोटी screen पर उतारा गया लेकिन बाद में यह screen बड़ी होती होती काफी बड़ी हो गई आज हम 32 इंच से भी बड़े टीवी देखते हैं। John के बाद 7 सितंबर 1927 को फर्नवर्थ ने electronic television का आविष्कार किया। अब आप यह तो जान ही गए होंगे कि Television ka aavishkar kab hua।

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Television meaning in Hindi  :-

television

आज लाखों लोग गूगल पर यह सर्च करते हैं कि टेलीविजन को हिंदी में क्या कहते हैं। टेलीविजन को हिंदी में ‘दूरदर्शन‘ कहा जाता हैं क्योंकि यह दूर की किसी व्यक्ति या वस्तु की गति करती हुई तस्वीर हमारे सामने दिखाता हैं।

वास्तव में टेलीविजन की स्क्रीन पर तस्वीरे ही होती हैं जो इतनी तेजी से बदलती हैं कि हमारी आँखों को लगता हैं कि वह गति कर रही हैं यानी वह चल रही है, इसीलिए इसे चलचित्र भी कहा जाता है। यह गति करती हुई तस्वीरे अब आधुनिक समय के साथ काफी आधुनिक हो गयी हैं।

Electronic television ka aavishkar kisne kiya  :-

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Television ka aavishkar kab hua यह तो हम पढ़ चुके है लेकिन अब ये जानना जरूरी है कि टेलीविज़न का विकसित रूप से विकास किस तरह से हुआ। John के मैक्निकल टेलिविजन बनाने के बाद 1927 में पहला इलेक्ट्रॉनिक टीवी सामने आया।

1927 में, Bell telephone laboratories की एक टीम ने दर्शकों के लिए छवि को दृश्यमान बनाने के लिए एक prototype flat panel plasma display का उपयोग करते हुए Washington से New York तक टेलीविजन प्रसारण का प्रदर्शन किया इस display में 2500 पिक्सल थे।

पहला इलैक्ट्रोनिक टीवी जिसका अविष्कार Philo Farnsworth ने किया। Philo ने इलेक्ट्रॉनिक टीवी बनाने के बाद इस का सार्वजनिक प्रदर्शन 3 सितंबर 1928 को किसी। उस समय Philo केवल 21 साल के थे। 1928 मे ही दुनिया का पहला टीवी स्टेशन WRGB शुरू किया गया।

Black and white se rangeen Tak  :-

television

टेलीविजन की शुरुआत में वह भले ही ब्लैक एंड वाइट रहा हो लेकिन जल्द ही उसे रंगों से भरा गया। जर्मनी तकनीशियन और आविष्कारक पॉल निप्कोओ पहली बार 1884 में 18 हॉरिजेंटल लाइनों से स्टेटिक इमेज भेजने में कामयाब रहे।

इसके बाद उनके जरिए बनाई गई ‘electronic telescope’ जल्दी ही भविष्य के कई mechanical television device के आधार बनी।1900 में पेरिस में हुए ‘World fair’ के पहले ‘international conference of electricity’ में रशियन साइंटिस्ट कॉन्सटेंटिन पर्सकेई ने पहली बार ‘टेलीविजन’ शब्द का इस्तेमाल किया।

1924-26 में स्कॉटलैंड के इंजीनियर चा‌र्ल्स जेनकिंस और जॉन लोगी बेयर्ड image transmitted method को mechanical और electrical दोनों फॉर्म में दिखाने में सफल रहे। पहली बार सन् 1927 में फिलो फा‌र्न्सवर्थ ने अपने electronic television system का पेटेंट करवाया।

इसके बाद अमेरिका में टीवी का पहली बार लाइसेंस 1928 में चा‌र्ल्स जेनकिंस ने लिया। दुनिया के पहले अमेरिकी टेलीविजन स्टेशन ने 1928 में काम शुरू कर दिया था, जिसके बाद 1930 में दुनिया के सबसे बड़े टीवी चैनल बीबीसी का प्रसारण शुरू हुआ किया गया।

इसके बाद चा‌र्ल्स जेनकिंस का पहला commercials TV program वर्ष 1930 में प्रसारित हुआ। वर्ष 1969 में 600 मिलियन लोगों ने चंद्रमा पर पहले मानव लैंडिंग का लाइव प्रसारण देखा। इसके बाद सोनी कंपनी ने पहली बार 1967 में होम वीडियो सिस्टम पेश किया।

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Bharat main tv ka aavishkar kab hua  :-

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Television ka aavishkar kab hua में यह जानना बेहद एहम हो जाता है कि भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत विश्व की तुलना में काफी बाद में लायी गयी थी। भारत में टेलीविजन को दूरदर्शन के नाम से जाना गया और आज भी इसे दूरदर्शन के नाम से ही जाना जाता है।

दूरदर्शन का पहला प्रसारण 15 सितंबर, 1959 को आधे घण्‍टे के लिए शैक्षिक और विकास कार्यक्रमों के रूप में शुरू किया गया। उस समय दूरदर्शन का प्रसारण सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही किया जाता था।

तब इसको ‘टेलीविजन इंडिया’ नाम दिया गया जिसे बाद में 1975 में बदलकर ‘दूरदर्शन’ किया गया। यह दूरदर्शन नाम इतना लोकप्रिय हुआ कि टीवी का हिंदी पर्याय बन गया। आज भी कई लोग टेलीविजन को दूरदर्शन के नाम से ही जानते हैं। इस बात से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि यह नाम उस समय कितना लोकप्रिय हुआ होगा।

शुरुआती दिनों में दिल्ली में 18 टेलीविजन सेट थे और एक बड़ा ट्रांसमीटर था। उस समय दिल्ली में लोग इसे कुतुहल और आश्चर्य के साथ देखते थे। इसके बाद दूरदर्शन ने धीरे-धीरे अपने पैर पसारने शुरू कर दिए और दिल्‍ली (1965), मुम्‍बई (1972), कोलकाता (1975) और चेन्‍नई (1975) में इसके प्रसारण की शुरुआत हुई।

अपनी शुरुआत में तो दूरदर्शन(television) दिल्ली और आसपास के कुछ क्षेत्रों में ही देखा जाता था। लेकिन दूरदर्शन को देश भर के शहरों में पहुँचाने की शुरुआत 80 के दशक में हुई और इसकी वज़ह 1982 में दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले एशियाई खेल थे। एशियाई खेलों के दिल्ली में होने का एक फायदा यह मिला कि black in white दिखने वाला दूरदर्शन अब रंगीन हो गया।

इसके बाद दूरदर्शन पर पारिवारिक कार्यक्रम का सिलसिला शुरू हुआ जिसने लोकप्रियता के रिकॉर्ड तोड़ दिए। 1984 में देश के गाँव-गाँव में दूरदर्शन पहुँचाने के लिए देश में लगभग हर दिन एक ट्रांसमीटर लगाया गया। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के विभाजन की कहानी पर बना बुनियाद जिसने विभाजन की त्रासदी को उस दौर की पीढ़ी से परिचित कराया।

इस धारावाहिक के सभी किरदा घर घर में लोकप्रिय हो चुके थे। फिर तो एक के बाद एक बेहतरीन और शानदार धारवाहिकों ने दूरदर्शन को घर घर में पहचान दे दी।

दूरदर्शन पर 1980 के दशक में प्रसारित होने वाले मालगुडी डेज़, ये जो है जिन्दगी, रजनी, ही मैन, वाहः जनाब, तमस, बुधवार और शुक्रवार को 8 बजे दिखाया जाने वाला फिल्मी गानों पर आधारित चित्रहार, भारत एक खोज, व्योमकेश बक्शी, विक्रम बैताल, टर्निंग प्वाइंट, अलिफ लैला, शाहरुख़ खान की फौजी

रामायण, महाभारत, देख भाई देख ने देश भर में अपना एक खास दर्शक वर्ग ही नहीं तैयार कर लिया था बल्कि गैर हिन्दी भाषी राज्यों में भी इन धारवाहिकों को ज़बर्दस्त लोकप्रियता मिली।

रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक धारावाहिकों ने तो सफलता के नए पैमाने खड़े कर दिए। 1986 में रामायण और इसके बाद शुरु हुए महाभारत के प्रसारण के दौरान रविवार को देश भर की सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर जाता था और लोग अपने महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से लेकर अपनी यात्रा तक इस समय पर नहीं करते थे।

रामायण की लोकप्रियता का आलम तो ये था कि लोग अपने घरों को साफ-सुथरा करके अगरबत्ती और दीपक जलाकर रामायण का इंतजार करते थे और एपिसोड के खत्म होने पर बकायदा प्रसाद बाटते थे। आज भी भारत में टेलीविजन की इतनी ही महत्वता है आज भी यह हमारे देश के हर घर में मौजूद लोगों का मनोरंजन करता है।

भारत में टेलीविजन की शुरुआत भले ही विश्व स बाद में हुई हो लेकिन देश में इसका प्रसार व्यापक तौर पर हुआ। आज लोगों के पास तरह-तरह के स्मार्ट टीवी अवेलेबल है। टेलीविजन के अविष्कार से आज के समय तक देखा जाए तो यह बहुत कम समय में अविष्कार से लोगों की जरूरत बन चुका है।

:- गुंजन जोशी
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