Home शिक्षा/GK Lok Kala: भारत में लोक कलाओं का संरक्षण जरूरी

Lok Kala: भारत में लोक कलाओं का संरक्षण जरूरी

0
1011

देश की अनेक जातियों व जनजातियों में पीढी दर पीढी चली आ रही पारंपरिक कला को लोककला(Lok Kala) कहते हैं। भारत में लोक कला के बहुत से रूप प्रचलित हैं, लेकिन सबसे प्रचलित रूप चित्रकारी का है।

इन कलाओं से कुछ आधुनिक काल में भी बहुत लोकप्रिय हैं। जैसे- मधुबनी(Madhubani), कलमकारी(Kamal kari), कांगड़ा(Kangra), गोंड(Gond), चित्तर, तंजावुर(Thanjavur), पिछवई, पिथोरा चित्रकला(pithora painting), फड़, यमुनाघाट तथा वरली भारत की कुछ प्रमुख लोक कलाएँ(Lok Kala) हैं।

भारत एक ऐसा देश ,है जहां पर सबसे ज्यादा लोक कलाओं (Lok Kala) का जन्म हुआ है। हमारे देश में बहुत सी ऐसी कलाएँ हैं, जिनके बारे में हम नहीं जानते। लोक कलाएं(Lok Kala) विभिन्न भाषा या धर्म की साझी विशेषता हैं।

Lok Kala

लोक कला(Lok Kala) और सभ्यता को एक दूसरे से जोड़कर देखा जाता है। जिस देश की लोककला जितनी विकसित होती है, उस देश की सभ्यता को भी उतना ही विकसित समझा जाता है। भारत प्राचीन काल से ही लोक कलाओं(Lok Kala) का देश है। यहां हम कई तरह के लोग कलाएं(Lok Kala) देखते हैं।

हमारे देश में प्राचीन काल से ही लोग चित्रकारी कलाएं प्रचलित है। हम अजंता की गुफाओं से लेकर आज की मधुबनी तक की लोक कलाओं(Lok Kala) के बारे में जानते हैं। जब इंसान के पास भाषा नहीं थी तब यह कलाएं थी जिसके जरिए हम एक दूसरे से संवाद किया करते थे। आज इन्हीं कलाओं से हमारे देश की संस्कृति को जाना जाता है।

लोक कला(Lok Kala) किसे कहते हैं यह तो आप जान चुके हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि चित्रकारी लोक कलाएं(Lok Kala) कितने प्रकार की होती है।

भारत की लोक चित्रकला और Lok Kala  :-

भारत जैसें देश में विभिन्न प्रान्तों में विविध रूपों में लोक चित्रकला देखी जा सकती है। जो कई नामों से जानी जाती है।

1) मधुबनी चित्रकला(Madhubani painting)

Lok Kala

मधुबनी चित्रकला बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के दरभंगा, मधुबनी और नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। मधुबनी जिले के जितवारपुर गांव इस लोक चित्रकला का मुख्य केंद्र है। अपने शुरुवाती दौर में यह चित्रकला रंगोली के रूप में विकसित हुआ।

फिर बाद में यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ो, दीवारों और कागज पर उतारी गई। मिथिला की औरतों के जरिए शुरू की गई इस घरेलू चित्रकला को बाद में पुरुषों ने भी अपना लिया है।

मधुबनी चित्रकला में कुल देवता का भी चित्र होता है। हिन्दू देव-देवताओं की तस्वीर, प्राकृतिक नजारे, सूर्य व चंद्रमा, धार्मिक पेड़-पौधे जैसे- तुलसी और विवाह के दृश्य हमे इसमें देखने को मिलते हैं। मधुबनी पेंटिंग दो तरह की होतीं हैं- भित्ति चित्र और अल्पना चित्र।

मधुबनी चित्रकला को पूजास्थान, कोहबर कक्ष और शादी या किसी खास उत्सव पर घर की बाहरी दीवारों पर बनाया जाता हैं। मधुबनी पेंटिंग में मां दुर्गा, काली, सीता-राम, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, गौरी-गणेश और विष्णु के दस अवतार का भी चित्र बनाया जाता है। इसके अलावा कई प्राकृतिक नजारों का भी चित्रण किया जाता है।

यह भी पढ़े :-Turkey ,US के बीच बढ़ा तनाव, लीरा इतिहास के निचले स्तर पर पहुंचा

2) पिथोरा चित्रकला(pithora painting)

Lok Kala

पिथोरा चित्रकला गुजरात के राठवास और भील जनजाति के लोगों का पारम्परिक चित्रकला है। यह कला रूप के बजाय अनुष्ठान से अधिक संबंधित है।

3) पट्टचित्र कला(pattachitra painting)

Lok Kala

‘पट्ट’ का अर्थ ‘कपड़ा’ होता है। यह ओड़िशा की पारम्परिक चित्रकला है। इस चित्रकला में सुभद्रा, बलराम, भगवान जगन्नाथ, दशवतार और कृष्ण के जीवन से जुड़े दृश्यों को दर्शाया जाता है।

4) कालीघाट चित्रकला(Kalighat painting)

Lok Kala

इस चित्रकला का का उदय लगभग 19वीं सदी में कोलकाता के कालीघाट मंदिर से माना जाता है। इस चित्रकला में मुख्यतः हिन्दू देवी-देवताओं तथा उस समय पारम्परिक किमवदंतियों के पात्रों के चित्रण देखने को मिलते हैं। प्राचीन समय में इस कला के चित्रकार देवी-देवताओं का चित्रण इस कला द्वारा लोगों को पट चित्र में गा-गाकर सुनाया करते थे। इस शैली की चित्रकला में चित्रकार लम्बे-लम्बे कागजों में रामायण, महाभारत और अन्य किम्वदन्तियों पर आधारित दृश्यों का चित्रण करते हैं, और गीत गाकर उसका वर्णन करते हैं।

5) थांका चित्रकला(Thanka)

Lok Kala

थांका चित्रकला भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधरित है। यह चित्रकला भारतीय, नेपाली और तिब्बती संस्कृति की चित्रकला की मिसाल है। इस के माध्यम से तिब्बती धर्म और संस्कृति के मूल्यों को अभिव्यक्त किया जाता है। इस का निर्माण सामान्यत: सूती वस्त्र के धुले हुए काटल कार किया जाता है।

इस चित्रकला को आध्यात्मिक चित्रकला भी कहते हैं। क्योंकि इस चित्रकला का विषय धार्मिक-आध्यात्मिक ही होता है। यह भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधरित चित्रकला होती है, इसलिए इसे बौद्ध चित्रकला भी कहा जाता है।

यह भी पढ़े :-FacebooktwitterwpEmailaffiliates सीसीएसयू की बीएससी कृषि की डिग्री बीएचयू में अमान्य

6) वर्ली चित्रकला (warli painting)

Lok Kala

यह चित्रकला महाराष्ट्र के जनजातीय प्रदेश में रहने वाले एक छोटे से जनजातीय वर्ग से संबंधित है। यह अलंकृत चित्र गोंड तथा कोल जैसे जनजातीय घरों और पूजाघरों के फर्शों और दीवारों पर बनाए जाते हैं।

वृक्ष, पक्षी, नर तथा नारी मिल कर एक वर्ली चित्र को पूरा करते हैं। ये चित्र शुभ अवसरों पर आदिवासी महिलाओं के दिनचर्या के एक हिस्से के रूप में बनाए जाते हैं। इन चित्रों की विषयवस्तु मुख्यता धार्मिक होती है। यह साधारण और स्थानीय वस्तुओं का प्रयोग करके बनाए जाते हैं। जैसे चावल की लेही तथा स्थानीय सब्जियों का गोंद।

पशु-पक्षी तथा लोगों का दैनिक जीवन भी चित्रों की विषयवस्तु का आंशिक रूप होता है। वर्ली जीवन शैली की झांकी सरल आकृतियों में खूबसूरती से प्रस्तुत की जाती है। दूसरी आदिवासीय कला के प्रकारों से भिन्न वर्ली चित्रकला(painting) में धार्मिक छवियों को महत्व नहीं दिया जाता।

Lok Kala

हमारे देश में मौजूद यह चित्रकला हमारे लिए इतिहास की धरोहर है। लेकिन आज यह चित्र कलाएं कहीं खोती हुई नजर आ रही है। आने वाली नई पीढ़ी इन्हें बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है जिससे इन चित्र कलाओं का हाथ हो रहा है।

कलाएं हमारी मूल्यवान धरोहर है जिसका संरक्षण जरूरी है। विलुप्त होती इन लोक कलाओं को बचाना हम सब का दायित्व है। आधुनिकीकरण के इस युग में मानव धीरे-धीरे अपनी लोक कला को भूलता जा रहा है। इन लोग कलाओं को बचा कर रखना हम सब की जवाबदेही है।

Lok Kala

भारत में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(Indian National Council of Research and Training) इन लोक कलाओं के बारे में जानकारी लेकर इन्हें बचाने में कदम उठा रही है। आज पूरे भारत में इकलौता बिहार ऐसा राज्य है जिसने अपनी लोक चित्रकला, “मैथिली चित्रकला”(Madhubani painting) को बचा कर रखा है।

इन लोक कलाओं को बचा कर रखना ही काफी नहीं है। इन्हें बचाने के साथ-साथ इनका संरक्षण भी जरूरी है। लोक चित्रकला एवं हमारे देश की धरोहर ही नहीं है, बल्कि कई लोगों के लिए रोजगार का साधन भी है।

:- गुंजन जोशी

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here