Saturday, July 2, 2022
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Turkey ,US के बीच बढ़ा तनाव, लीरा इतिहास के निचले स्तर पर पहुंचा

तुर्की(Turkey) ने US समेत 10 देशों के envoys को बाहर निकाल दिया था। आज जानते है आखिरकार इस देश ने ने ऐसा क्यों किया था, आज इस लेख में जानते है इस देश का ऐसा करने के पीछे का कारण और इससे जुड़े इसके इतिहास के बारे में।

राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन :-

Turkey

Turkey का ऐसा करने के पीछे दो मुख्य कारण थे। एक FATF के ग्रे लिस्ट में शामिल होना था और दूसरा जो कि प्रमुख(main) कारण है वो है एक व्यक्ति ओस्मान कावला(Osman kavala)। ओस्मान कावला (Osman kavala) Turkey का एक व्यापारी, दानी ओर एक समाजसेवी है।

इंटरनल अफेयर्स की माने तो कावला(osman kavala) पे ये आरोप है कि 19 साल से राष्ट्रपति(President) रहे एरडोगन(Erdogan) को पद से हटाने के लिए हो रहे आंदोलन को osman Kavala ने फंडिंग दी थी। लोकतंत्र की तो यही सुन्दरता है कि आप इसमें सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर सकते या है रहे प्रदर्शन का समर्थन कर सकते है।

फंडिंग करना कोई अपराध नहीं था इसलिए 2016 में हुए सैन्य तकथापलट कि कोशिश का आरोप Erdogan ने Kavala पर लगा दिया और 2017 में उसे जेल में डाल दिया जो अब तक जेल में ही है।

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Turkey का वो फैसला :-

Turkey

US समेत इन यूरोपीय देशों का कहना है कि ’19 साल से चल रही सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन का समर्थन करना कोई गुनाह तो है नहीं बल्कि ये लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बढ़ावा देना हुआ’। इसलिए ये देश ओस्मान कावला(osman kavala) कि रिहाई का pressure Erdogan पर बना रहे थे।

Turkey ने अपने इतिहास में एक फैसला लिया था इसी फैसले के कारण क्या ये देश अब तुर्की पर pressure बनाने कि कोशिश कर पा रहे है। तुर्की का एक छोटा सा भाग यूरोप में भी पड़ता है यही कारण था कि इस देश ने खुद को यूरोप के तर्ज पर एक लोकतांत्रिक देश और मानव मूल्यों को बढ़ावा देने वाले देश के रूप में स्थापित किया।

1950 में यूरोप के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया,जिसमे ये था कि यूरोप कि तरह Turkey भी मानवाधिकार के साथ खड़ा रहेगा। इसी समझौते के तहत यूरोप में एक कोर्ट का निर्माण हुआ ECHR(Europe Court on Human Rights) जो मानवाधिकार कि रक्षा हेतु काम करेगा,जिसका सदस्य तुर्की भी बना और आज भी है।

इसी ECHR ने 10 दिसंबर 2019 को तुर्की के खिलाफ फैसला दे दिया था, जिसमे कोर्ट ने तुर्की को आदेश दिया कि Kavala को जेल में रखना मानवाधिकार नियमों के खिलाफ है और उसे जल्द रिहा किया जाए। कोर्ट के इस फैसले को तुर्की ने अनसुना कर दिया।

European Union का Turkey के खिलाफ फैसला :-

17 सितंबर 2021 को European Union कि Council of Union ने भी तुर्की पे ये फैसला दिया कि नवंबर से पहले Kavala को रिहा किया जाए। अगर तुर्की ने फैसला मानने से मना किया तो उसे दूरगामी परिणाम भुगतने होंगे। इस फैसले के एक महीने बाद यानी कि 18 अक्टूबर को

US, Canada, NewZealand, France, Finland, Swedan, Denmark, Germany, Netherlands, Norway इन 10 देशों के envoys ने संकुक्त आकर तुर्की के राष्ट्रपति Erdogan को अल्टीमेटम दे दिया कि अगर EU कि बात नहीं मानी तो Sanction झेलने होंगे।

इस धमकी के बाद ही Erdogan ने इन envoys को देश छोड़ने का आदेश दे दिया। जाहिर सी बात है तुर्की ने ये फैसला ऐसे ही नहीं ले लिया था,पर तैश में लिए इस फैसले का परिणाम तुर्की पे भी भारी पड़ा।

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लीरा का गिरना :-

Turkey

लीरा (टर्किश करंसी) हाल ही में डॉलर के मुकाबले बहुत ही ज्यादा गिर चुकी है। बताया जाता है कि लीरा का गिरना कहीं न कहीं एरडोगन(Erdogan) के फैसले का नतीजा है। ये वही फैसला है जो एरडोगन ने EU का फैसला ना मानने का किया था। US तो आज तक तुर्की से नाराज़ है।

:- सौरभ चौधरी
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