Friday, July 1, 2022
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जैविक खेती- Organic farming: शुरू करें और इसके लाभ उठाएं

जैविक खेती(Organic farming) कृषि(farming) का एक प्रकार है। जिसमें संश्लेषित उर्वरकों(synthetic fertilizers) और संश्लेषित कीटनाशकों(synthetic insecticide) का कम प्रयोग किया जाता है। ऑर्गेनिक फार्मिंग में कृषि की उर्वरा शक्ति(fertility power) को बनाए रखा जाता है।

इसमें हरी खाद(green manure), कंपोस्ट(composed), और फसल चक्र(crop circle) का यूज किया जाता है।
ऑर्गेनिक फार्मिंग(Organic farming) मानव स्वास्थ्य(human health) के लिए बहुत अच्छी होती है। खेती की इस विधि से शरीर तुलनात्मक रूप से स्वस्थ रहता है।

Organic farming

कीटनाशक(insecticide) और खाद(fertilizer) का प्रयोग करने से फसल जहरीली होती है, और हेल्थ पर बुरा असर डालती है। आज के busy lifestyle में जहां लोगों को अपनी सेहत का ध्यान नहीं रहता वही organic farming हमारी हेल्थ के लिए जरूरी हो चुकी है।

ऑर्गेनिक फार्मिंग में कंपोस्ट का यूज किया जाता है। कंपोस्ट को खाद और जैविक पदार्थों(Organic matter) के अपघटन(decomposition) से बनाया जाता है। कंपोस्ट बनाने का सबसे आसान तरीका है, इसमें जैव पदार्थों(Organic matter) का ढेर बनाकर कुछ समय तक रख देना। जिससे उसका विघटन हो जाए और वह ह्यूमरस में बदल जाए।

आज हेल्थ अवेयरनेस बढ़ने से लोग हेल्थ कॉन्शियस हो गए हैं। गूगल पर हजारों लोग सर्च करते हैं कि- how to start organic farming in Hindi ऑर्गेनिक फार्मिंग कैसे शुरू करें।

तो चलिए आपको बताते हैं कि ऑर्गेनिक फार्मिंग(Organic farming) कैसे की जाती है  :-

ऑर्गेनिक फार्मिंग केमिकल खाद(chemical fertilizers)

Chemical fertilizers

के इस्तेमाल पर रोक लगाती है। इसमें फसलों के अवशेष(crop residues) और पशु खाद(animal manure) का इस्तेमाल होता है, क्योंकि इन में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व(minerals) मौजूद होते हैं। जो खाने के जरिए हमारे शरीर तक पहुंचते हैं, और हमें स्वस्थ(healthy) रखते हैं।

जैविक खेती(organic farming)

Organic farming

को हम देसी खेती भी कहते हैं। यह पर्यावरण को संतुलित रखते हुए की जाती है। इसमें फसलों के उत्पाद में रसायनिक खाद(chemical fertilizers), कीटनाशकों(insecticide) का उपयोग नहीं किया जाता। जिससे फसल की गुणवत्ता बनी रहती है।

ऑर्गेनिक फार्मिंग(Organic farming) में गोबर की खाद

 

Organic farming

(manure), कंपोस्ट(composed), जीवाणु खाद(bacterial fertilizer) का उपयोग किया जाता है। ऑर्गेनिक फार्मिंग को प्रकृति के लिए वरदान भी कहा जाता है। क्योंकि इसमें मिट्टी की उर्वरा क्षमता बनी रहती है।

ऑर्गेनिक फार्मिंग की प्रक्रिया- process of Organic farming in Hindi ऑर्गेनिक फार्मिंग करने के लिए इसे जान लेना जरूरी है इस तरह करनी चाहिए ऑर्गेनिक फार्मिंग  :-

मिट्टी की जांच (soil check)

Organic farming

अगर आप ऑर्गेनिक फार्मिंग करना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें अपने खेत की मिट्टी की जांच करवानी चाहिए। ताकि आप मिट्टी से संबंधित सारी जानकारी ले सकें। मिट्टी की जांच करवाने के लिए सरकारी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की प्रयोगशाला(laboratory of Government agriculture University) का प्रयोग किया जा सकता है।

मिट्टी की जांच से हमें पता चलता है कि मिट्टी में किन उर्वरक तत्वों की कमी है। इन तत्वों की कमी के बाद हम मिट्टी में इन तत्वों को पूरा करने के लिए काम कर सकते हैं। मिट्टी की कमी जानने के बाद ही किसान खाद(fertilizer) और उर्वरकों का सही तरीके से यूज कर सकता है।

जैविक खाद बनाए (Making organic compost)

Compost

आर्गेनिक फार्मिंग करने के लिए सबसे जरूरी आर्गेनिक कंपोस्ट बनाना है। आर्गेनिक कंपोस्ट एसी का है जो गोबर और फसलों के अवशेष से बनाईं जाती है। हम 3-6 महिनों में वेस्ट डिस्पोजर की मदद से आर्गेनिक कंपोस्ट बना सकते हैं।

अब आप सोचेंगे कि ऑर्गेनिक खाद कैसे बनाएं तो शरीर बताते हैं आपको कि ऑर्गेनिक खाद कैसे बनाई जाती है।
ऑर्गेनिक खाद को कई तरीकों से बनाया जाता है। जैसे- गोबर गैस की खाद, गोबर की खाद, और हरी खाद।

ऑर्गेनिक खाद को प्राकृतिक खाद भी कहते हैं। क्योंकि इसे बनाने की प्रक्रिया में किसी भी तरीके का कोई केमिकल यूज नहीं किया जाता।

यह भी पढ़े :-Corn Flour क्या है? मक्के के आटे से कितना होता है अलग

वर्मी कंपोस्ट(vermi compost)

Compost

वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने का सबसे आसान तरीका है। वर्मी कंपोस्ट को केंचुए की खाद भी कहा जाता है। यह खाद भूमि को उपजाऊ बनाती है। केंचुए की खाद बनाने के लिए 3 से 5 किलो केंचुए, गोबर और नीम की पत्ती को मिट्टी में डालना होता है।

केंचुए को किसान का दोस्त भी कहा जाता है, क्योंकि यह जमीन से अपशिष्ट पदार्थों को खाकर जमीन को हवादार बनाता है। जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं।

वर्मी कंपोस्ट(vermi compost) बनाने के लिए छायादार वातावरण की जरूरत होती है। इस खाद को बनाने के लिए यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस जगह पर एक हाथ बनाई जा रही है, उस जगह पर जल निकासी की उचित व्यवस्था हो। 1 किलो केंचुए, 1 घंटे में, 1 किलो वर्मी कंपोस्ट बनाते हैं।

जो फसलों को कीड़ों से तो बच आते ही हैं, साथ ही उन्हें पोषक तत्व(minerals) भी देते हैं। इस खाद की फसलों में एंटीबायोटिक(antibiotic) होता है।

गोबर की खाद बनाने की प्रक्रिया- Process of making manure

Organic farming

गोबर की खाद(manure fertilizer) बनाने के लिए 5 से 10 मीटर लंबा गड्ढा खोदना होगा। इस गड्ढे में एक प्लास्टिक शीट(plastic sheet) फैला कर उसमें गोबर(manure), फलों के अवशेष(fruit remains) और पानी(water) मिलाकर मिट्टी और गोबर से बंद कर देना होगा। लगभग 20 दिनों बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं और लगभग 2 महीने बाद इस मिश्रण को दोबारा मिलाकर बंद कर दें। तीसरे महीने में आपको गोबर की खाद तैयार मिलेगी। इसे अपनी जरूरत के हिसाब से खेतों में खाद के तौर पर डाल सकते हैं।

गोबर की खाद से फसलों की तेजी से वृद्धि तो होती ही है, साथ ही फसलों में पोषक तत्व भी बढ़ते हैं।

हरी खाद- Green composed

Organic farming

आप जिस खेत में ऑर्गेनिक फार्मिंग करना चाहते हैं। उस खेत में बारिश होने के वक्त लोबिया(Lobia), मूंगा(moong), उड़द(udad) में बुवाई करवा दें, लगभग 40 से 60 दिनों के बाद उस खेत की जुताई करवा दें।
ऐसा करने से खेत को हरी खाद(green composed) मिलेगी। हरी खाद में नाइट्रोजन(nitrogen), गंधक(sulphur), पोटाश(potash), मैग्नीशियम(magnesium), कैल्शियम(calcium), कॉपर(copper), आयरन(iron) और जस्ता(jasta) भरपूर मात्रा में होता है। जो खेत की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाता है।

जैविक खेती और ऑर्गेनिक खेती(Organic farming) में क्या अंतर है  :-

Organic farming

जैविक खेती और ऑर्गेनिक खेती दोनों एक ही होती हैं। ऑर्गेनिक फार्मिंग को हिंदी में जैविक खेती कहा जाता है। दो अलग-अलग शब्दों से बहुत से लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि क्या यह दोनों अलग चीज है। लेकिन नहीं यह दोनों एक ही होती है।

ऑर्गेनिक फार्मिंग के लाभ: benefits of Organic farming  :-

Organic farming

ऑर्गेनिक फार्मिंग(Organic farming) क्या है, और यह कैसे की जाती है, यह तो हम जान चुके हैं। लेकिन बहुत कम लोग हैं जो ऑर्गेनिक फार्मिंग की लाभ(benefits of Organic farming) के बारे में जानते हैं। ऑर्गेनिक फार्मिंग किसान(farmer) और पर्यावरण(environment) दोनों के लिए लाभ का सौदा है।

इससे किसानों को कम लागत में अच्छी गुणवत्ता की फसल मिलती है। ऑर्गेनिक फार्मिंग(Organic farming) के बहुत सारे लाभ है जो इस तरह है-

1) Organic farming

ऑर्गेनिक फार्मिंग(Organic farming)से भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है। रासायनिक खाद(chemical fertilizers) के उपयोग से भूमि बंजर होती है। वही और ऑर्गेनिक फार्मिंग के यूज़ से भूमि की उर्वरा क्षमता लौटती है इससे फसल में वृद्धि होती है।

2)Organic farming

ऑर्गेनिक फार्मिंग ऐसी जगहों के लिए बेहतर है, जहां कम पानी है। ऑर्गेनिक फार्मिंग से कम पानी में खेती की जा सकती है। क्योंकि इसमें जैविक उर्वरकों का यूज किया जाता है, इसीलिए फसलों में पानी की जरूरत कम होती है।

3)Organic farming

रासायनिक खादों के प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषित होता है, वही जैविक खेती से प्रदूषण में कमी आती है। खेतों में ज्यादा रसायन यूज करने से वनस्पति, जानवर और पशु पक्षियों के मरने का खतरा होता है। तो वही ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर से वातावरण शुद्ध होता है।

4)Organic farming

हम जितने ज्यादा केमिकल यूज करते हैं वह हमारी हेल्थ पर इतना ही बुरा असर डालते हैं। इसीलिए हमें ज्यादा से ज्यादा ऑर्गेनिक फार्मिंग का यूज करना चाहिए।

5)Organic farming

रसायनिक उत्पादों की ओर से फसल तो बेहतर होती है, लेकिन उनके महंगे होने की वजह से किसान के उत्पादन की कीमत में कमी आ जाती है। ऑर्गेनिक फार्मिंग किसान को सस्ता और आसान तौर पर उपलब्ध होती है। इसके यूज़ से उत्पाद कीमतें बढ़ती है और औसत आय(average income) में वृद्धि होती है।

6)

ऑर्गेनिक फार्मिंग से भू जल(groundwater) मे वृद्धि होती है। रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से भूमि के अंदर का पानी सूख जाता है, जबकि ऑर्गेनिक फार्मिंग से जमीन की नमी बनी रहती है। जिससे जमीन के जल धारण करने की शक्ति बढ़ती है।

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ऑर्गेनिक खेती की अवधारणा  :-

Organic farming

ऑर्गेनिक फार्मिंग(Organic farming) जितनी हमारी हेल्थ के लिए जरूरी है, उतनी ही भूमि के लिए भी जरूरी है। आप जानकर हैरान होंगे कि ऑर्गेनिक फार्मिंग भारत की ही देन है। हमारे देश में कृषि का इतिहास 5000 साल पुराना है।

भारत की शुरुआत से ही इसके मूल बिंदु के रूप में कृषि थी, लेकिन आज हम ऑर्गेनिक फार्मिंग(Organic farming) की स्थिति भारत में खराब पाते हैं। ज्यादा से ज्यादा फसल उगाने की होड़ ने इंसान को लालची बना दिया है। अपने इसी लालच में हम पर्यावरण(environment) को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

आज किसान ज्यादा उगाने के चक्कर में खेती में केमिकल का यूज कर रहा है। जिससे फसल तो ज्यादा हो रही है, लेकिन इसके पोषक तत्व(nutrients) खत्म हो रहे हैं, और भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है।

इन केमिकल्स की वजह से ही लोग तरह-तरह की बीमारियों का भी शिकार हो रहे हैं। खेती नहीं रसायनों के प्रयोग से पर्यावरण असंतुलन(environmental imbalance) भी तेजी से हो रहा है। हालाँकि organic farming को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास जारी है|

:- गुंजन जोशी
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