Janmashtami Pujan: जन्माष्टमी की पूजा करने के बाद करें यह छोटा सा काम, लड्डू गोपाल बसाएंगे कृपा

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Janmashtami Pujan: भाद्रपद महा की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है जिसे हम जन्माष्टमी (Janmashtami) के रुप में मनाते हैं। इस बार भी जन्माष्टमी 18 अगस्त गुरुवार के दिन पर पड़ने वाली है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हो गया था। और साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस बार की जन्माष्टमी (Janmashtami) बहुत ही खास होने वाली है क्योंकि इस बार के दिन जन्माष्टमी पर वृद्धि योग भी बनने वाला है। इसे बहुत ही ज्यादा शुभ भी बताया जाता है।

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इस दिन पर शुभ मुहूर्त में श्री कृष्ण की पूजा करने पर शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है। कहा जाता है कि अगर आप घर पर ही श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं तो इसके बाद में कुंज बिहारी जी की आरती जरूर करनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको पूजा का पूरी तरीके से फल प्राप्त नहीं हो पाता है। इसी के साथ-साथ श्री कृष्ण की कृपा भी नहीं मिल पाती है। तो चलिए जानते हैं कुंज बिहारी जी की आरती और इस दिन का क्या है शुभ मुहूर्त।

कुंजबिहारी लाल की आरती

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की।
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;
चरन छवि श्रीबनवारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद।।
टेर सुन दीन भिखारी की॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

जन्माष्टमी (Janmashtami) तिथि 2022 के साथ जाने शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग की मानें तो जन्माष्टमी (Janmashtami) तिथि इस बार 18 अगस्त 2022 गुरुवार के दिन मनाई जाने वाली है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अगस्त शाम 9:21 से हो जाएगा और 19 अगस्त रात 10:09 तक होगा।

इस दिन पर अभिजीत मुहूर्त 18 अगस्त दोपहर 12:05 और 12:56 मिनट तक रहने वाला है। वहीं दूसरी तरफ से शुभ वृद्धि योग 17 अगस्त दोपहर 8:56 से शुरू हो जाएगा और 18 अगस्त रात 8:41 तक रहने वाला है।

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