Monday, July 4, 2022
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Dev Deepawali 2021: कब है देव दीपावली,जानिये क्यों यह त्यौहार हैँ हिन्दू धर्म में इतना महत्वपूर्ण

देव दीपावली का त्यौहार हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। देव दीपावली का उत्सव कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को प्रारंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा की तिथि को समाप्त हो जाता है। इसे देव दीपावली इसीलिए कहा जाता है क्योंकि जब असुर भाइयों पर भगवान शिव ने जीत प्राप्त की थी तो सभी देवी-देवताओं ने जश्न मनाते हुए दीपावली मनाई थी। तभी से इस दिन का नाम देव दीपावली रख दिया गया था। तो चलिए जान लेते हैं कब है देव दीपावली, और साथ ही जानते हैं इसका महत्व –

कब मनाई जाएगी देव दीपावली

इस साल देव दीपावली 18 नवंबर यानी कि आज दोपहर 12:00 बजे से प्रारंभ हो गई है और 19 नवंबर 2021 को दोपहर 2:26 बजे देव दीपावली समाप्त हो जाएगी।

कब है देव दीपावली की पूजा का शुभ मुहूर्त

ऐसा माना जाता है कि देव दीपावली की पूजा हमेशा प्रदोष काल के दौरान ही करते हैं। इसकी पूजा का मुहूर्त शाम 5:09 से शुरू हो जाएगा और 7:47 बजे समाप्त हो जाएगा।

क्या है देव दीपावली का महत्व

तारकासुर नाम का एक राक्षस हुआ करता था। तारकक्ष, विद्युन्माली और कमलाक्ष यह तारकासुर के 3 पुत्र हुआ करते थे। इन तीनों ने ही कठोर तपस्या की। जिसके बाद इन तीनों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा प्रकट हुए और उनसे वर मांगने को कहा तो इन तीनों ने ही भगवान ब्रह्मा से अमरता का वर माँगा। लेकिन ये वरदान सृष्टि के नियमों के विरूद्ध था, इसलिए ब्रह्म देव ने यह वरदान देने से मना कर दिया।

इसलिए ब्रह्म देव ने उन्हें इसके अतिरिक्त वरदान दिया कि जब तक उन तीनों को कोई एक ही तीर से ना मारे तब तक उनकी मृत्यु संभव नहीं होगी। वरदान मिलते ही उन तीनों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि मानव सभ्यता के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गए।

ये सब देखते हुए भगवान शिव ने त्रिपुरारी का अवतार लिया और एक तीर से तीन राक्षसों का वध कर दिया। जिसके बाद भगवान शिव को त्रिपुरासुर के नाम से भी जाना जाता है।

यह त्योहार पवित्र शहरों में गिने जाने वाले वाराणसी और अयोध्या जैसे शहरों में बहुत ही बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाता है। इस दिन भक्त गंगा जी में डुबकी लगाकर खुद को पवित्र करते हैँ। जिसके बाद शाम में घाट और घरों में दीपक भी जलाये जाते हैँ। दीप जलाकर भगवान शिव को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है, भगवान शिव को काशी शहर में विश्वनाथ के नाम से भी जाना जाता है।

Kanchan Goyalhttps://factspigeon.com
कंचन गोयल अभी माखनलाल पत्रिकारिता विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी कर रही हैं। इसके अलावा इन्हे निष्पक्ष होकर पत्रिकारिता करना पसंद है। सच्चाई और तथ्यों के आधार पर स्टोरी करने को महत्व देती हैं। इनका मानना है कि पढ़ाई, लिखाई करने से रचनात्मक सोच में उत्पत्ति है।
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