Monday, July 4, 2022
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Ganesh Ji का क्रोध शांत कर ब्रह्मा जी ने कैसे कराई शादी, जाने श्री गणेश के विवाह की कहानी

बुधवार का दिन श्री गणेश का दिन है| भगवन गणेश (Ganesh Ji) शिवजी और पार्वती के पहले पुत्र हैं। उनकी पूजा सभी देवी देवताओं में सबसे पहले की जाती है। देवताओं में सबसे बड़े होने के बाद भी उनके जीवन में एक शौक था। उनका विवाह नहीं हो रहा था, कोई भी कन्या उनसे विवाह नहीं करना चाहती थी क्योंकि उनका सिर हाथी का एक दांत टूटा हुआ था।

इस कारण गणेश जी (Ganesh Ji) बहुत दुखी रहने लगे जब वह किसी अन्य देवी-देवताओं की भी शादी में जाते थे तो उन्हें अपने शादी ना होने गम सताता था। इस कारण वह अन्य देवी-देवताओं के विवाह में खलल डालने लगे, इस शरारत में उनका साथ वाहन मूषक देता था। मूषक देवी देवताओं की शादी में जाकर उनका मंडप खराब कर देता था जिससे शादी नहीं हो पती थी।

गणेश जी के शरारतों से देवी देवता हुए परेशान:-

गणेश जी (Ganesh Ji) के इन सरारतों से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव और माता पार्वती से उनकी शिकायत करने चल दिए। देवताओं की बात सुनकर शिव जी ने कहा कि वह भी इस परिस्थिति का निवारण नहीं कर सकते इसका हल सिर्फ ब्रह्म देव के पास है और सभी देवी देवताओं को उनके पास जाने की सलाह दी।

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ब्रह्म देव की पुत्रियां:-

शिव जी और माता पार्वती की बात सुनकर सारे देवता ब्रह्मा जी के पास गए। जिस समय देवी देवता ब्रह्म देव के पास पहुंचे वह योग में लीन थे। देवता ब्रह्म देव से प्रार्थना करने लगे। उनकी प्रार्थना सुन ब्रह्म देव ने अपने योग से रिद्धि और सिद्धि नामक अपनी दो पुत्रियों को प्रकट किया।

योग से प्रकट हुई ब्रह्म देव की पुत्री रिद्धि सिद्धि को मानस पुत्री कहा जाता है। ब्रह्मा जी ने अपनी दोनों पुत्रियों को लेकर गणेश जी (Ganesh Ji) के पास गए और उन्हें अपनी पुत्रियों को शिक्षा देने को कहा क्योंकि गणेश जी बहुत ही बुद्धिमान और परम ज्ञानी थे। गणेश जी ने रिद्धि सिद्धि की शिक्षा शुरू कर दी।

अब जब भी उनका मुंह शक किसी देवी देवता के विवाह का समाचार उनके पास लाता था तो रिद्धि सिद्धि कुछ ना कुछ करके मूषक को भगा देती थी इससे सभी देवी देवताओं का विवाह विधि विधान से संपन्न हो जाता था।

गणेश जी हुए क्रोधित :-

इसी तरह काफी दिन बीत गया और सभी देवी देवताओं का विवाह अच्छे से संपन्न होने लगा। एक दिन जब गणेश जी (Ganesh Ji) को इस बात का पता चला कि रिद्धि सिद्धि उनके मुंह शक को उन तक विवाह का समाचार नहीं पहुंचाने देती तो वह बहुत ज्यादा क्रोधित हुए।

उनको क्रोध में देख ब्रह्मा जी उनके सामने तुरंत प्रकट हुए। ब्रह्मा जी को देख कर भी गणेश जी का क्रोध शांत नहीं हुआ। तब जाकर ब्रह्मा जी ने श्री गणेश (Ganesh Ji) से उनके दोनों पुत्री रिद्धि और सिद्धि से विवाह करने का प्रस्ताव रखा। गणेश जी ने ब्रह्मा जी के इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और उनकी दोनों पुत्री रिद्धि और सिद्धि से विधिवत विवाह किया। वेद पुराणों के अनुसार गणेश जी के रिद्धि सिद्धि से दो पुत्र हुए। उन्हें शुभ और लाभ नाम से जाना जाता है।

 

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